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Basic Healthcare Services

Swasthya Ka Safar – A Rural Nurse-Midwives Fellowship Program

Swasthya ka Safar (the journey to health) is a fellowship for rural nurse-midwives led by Basic Healthcare Services and International Center for Research on Women, Asia. It focuses on 3 core pillars (Leadership, Gender and Patriarchy, and Compassion), is in Hindi, and is the first programme of its’ kind across the country.

The programme brings together 11 healthcare organisations: Aarohi (Uttarakhand), ARTH (Rajasthan), BHS (Rajasthan), Gram Seva Trust (Gujarat), Jan Swasthya Sahyog (Chhattisgarh), Lok Biradari Prakalp (Maharashtra), MGIMS (Maharashtra), Sangwari (Chhattisgarh), Seva Mandir (Rajasthan), Seva Rural (Gujarat), Shaheed Hospital (Chhattisgarh), and TIDE Trust (Gujarat). There is also participation of Government nurse-midwives (Rajasthan).

Meet our Fellows

We are proud to introduce our fellows—29 nurse-midwives, all hailing from rural areas spread across different parts of north India. In a world shaped by deep-rooted societal barriers, these women have carved their paths with courage, determination, and resilience. Serving in regions where access to healthcare is often limited, they work tirelessly to ensure that quality care reaches those who need it most. To find out more about them, click on their photos!

SKS - Batch 2026

Shakti Saajhi – SKS Mentors

Every fellow needs a space to be themselves — to ask hard questions, share what’s working, admit what isn’t, and think out loud without judgment. That’s what mentoring offers within the fellowship: a trusted companionship where fellows can bring their authentic selves, their doubts, and their victories, big and small.

We call our mentors Shakti Saajhis — “partners in strength.” Nine remarkable women leaders come together in this role, bringing with them decades of experience across nursing, medicine, public health, nutrition, gender, and community development. Each has spent her career walking alongside rural, tribal, and underserved communities, working towards health, dignity, and gender equity — not as abstract goals, but as lived commitments.

It is this depth of experience and quiet conviction that our Shakti Saajhis bring to their fellows — helping them grow as leaders, sharpen their practice, and find their own footing, both professionally and personally.

नीमा कर्मियाल, आरोही, स्टाफ नर्स

नीमा कर्मियाल वर्तमान में आरोही द्वारा संचालित अमृत क्लिनिक, सूनी, नैनीताल में पब्लिक हेल्थ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में कुल तीन वर्षों का अनुभव है तथा वे अपने वर्तमान संस्था में पिछले पाँच महीनों से कार्य कर रही हैं। उनका मूल गाँव कर्मी, कपकोट, ज़िला बागेश्वर है।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा विवेकानंद विद्या मंदिर, बागेश्वर से पूरी की तथा नर्सिंग की पढ़ाई पाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड मेडिकल साइंस, हल्द्वानी, नैनीताल से की। उनकी शैक्षणिक योग्यता पोस्ट बेसिक बी.एससी. नर्सिंग है।

बचपन में उन्होंने अपनी बुआ को एएनएम के रूप में समुदाय में जाकर लोगों से संवाद करते हुए और दवाइयाँ वितरित करते हुए देखा। इन अनुभवों ने उन्हें नर्सिंग को अपने करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

पूजा जोशी, आरोही, पब्लिक हेल्थ नर्स

पूजा जोशी वर्तमान में आरोही में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें कुल पाँच वर्ष पाँच माह का कार्य अनुभव है। उनका मूल गाँव शीतला मुक्तेश्वर, ज़िला नैनीताल, उत्तराखंड है। उन्होंने कक्षा 5 तक की प्रारंभिक शिक्षा शीतला मुक्तेश्वर के सरकारी प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की तथा कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा गवर्नमेंट इंटर कॉलेज से पूरी की। इसके पश्चात उन्होंने कक्षा 9 से 12 तक की माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा डीएसआईसी, पीओरा से प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हल्द्वानी स्थित पाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड मेडिकल साइंसेज़ से नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त की है और कला स्नातक (बी.ए.) की डिग्री भी हासिल की है।

पढ़ाई के दौरान, कक्षा 9 में रहते हुए, वे अपनी दादी की देखभाल करती थीं और उन्हें इंजेक्शन भी लगाती थीं। उस समय उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र की अधिक जानकारी नहीं थी और वे प्रारंभ में शिक्षिका बनना चाहती थीं। बाद में अपने भाई के मार्गदर्शन से उन्होंने नर्सिंग को करियर के रूप में चुनने का निर्णय लिया, जिससे इस क्षेत्र में उनकी रुचि धीरे-धीरे बढ़ती गई।

प्रेमिला पाटीदार, बीएचएस, नर्स कोऑर्डिनेटर

प्रेमिला पाटीदार अमृत क्लिनिक, बेसिक हेल्थकेयर सर्विसेज़, मानपुर, राजस्थान में नर्स कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले 1 वर्ष 6 माह से इस पद पर सेवाएँ दे रही हैं। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 11.5 वर्षों का अनुभव है तथा वे पिछले 10 वर्षों से बीएचएस के साथ जुड़ी हुई हैं। इससे पूर्व में वे पीएचसी निठाउवा में राज्य सरकार और बीएचएस द्वारा संयुक्त रूप से संचालित परियोजना [पीपीपी} के अंतर्गत कार्य कर रही हैं।

वे राजस्थान के डूंगरपुर ज़िले की सागवाड़ा तहसील के कानपुर गाँव की निवासी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सागवाड़ा से पूरी की और सरकारी नर्सिंग कॉलेज, डूंगरपुर (राजस्थान) से एएनएम की पढ़ाई की। एएनएम कोर्स में प्रवेश दिलाने में उनके पिता का सहयोग रहा।

अपने करियर के प्रारंभिक दौर में उन्होंने सागवाड़ा स्थित एक क्लिनिक में डेढ़ वर्ष तक कार्य किया।

गंगा परमार, बीएचएस, नर्स कोऑर्डिनेटर

गंगा परमार वर्तमान में बेसिक हेल्थकेयर सर्विसेज़ (बीएचएस) में नर्स कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत हैं। वे पिछले छह वर्षों से इस संस्था से जुड़ी हुई हैं और उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल आठ वर्षों का अनुभव है। वे राजस्थान के डूंगरपुर ज़िले की आसपुर तहसील के सागोट गाँव की निवासी हैं।

उन्होंने कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा अपने गाँव सागोट से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने आर.सी. मेमोरियल नर्सिंग इंस्टीट्यूट कॉलेज, फालना, ज़िला पाली, राजस्थान से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की। नर्सिंग के क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली, जिन्होंने हर चरण में उन्हें पूरा सहयोग और मार्गदर्शन दिया।

रामिला डामोर, बीएचएस, स्टाफ नर्स

रमिला डामोर  वर्तमान में अमृत क्लिनिक, बेडावल (बेसिक हेल्थकेयर सर्विसेज़) में सीनियर नर्स के पद पर कार्यरत हैं। वे पिछले 4 वर्ष 7 माह से  इस संस्था में अपनी सेवाएँ दे रही हैं और उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में कुल साढ़े 5 वर्षों का कार्य अनुभव है।

वे ग्राम पाटिया कोडर, पोस्ट बालर बोधायन, तहसील आनंदपुरी, ज़िला बाँसवाड़ा, राजस्थान की निवासी हैं। उन्होंने 12वीं कक्षा की शिक्षा बागीदौरा से प्राप्त की तथा इसके पश्चात महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग कॉलेज, जयपुर से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की।

अपने आसपास एक वृद्ध व्यक्ति को बार-बार बीमार पड़ते हुए और उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करते देख, उनकी माता जी ने उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उन्हें इस पेशे को अपनाने की प्रेरणा मिली।

उर्मिला कुमारी कलासुवा, बीएचएस, नर्स कोऑर्डिनेटर

उर्मिला कुमारी कलासुवा बेसिक हेल्थ केयर सर्विसेज में कार्यरत हैं, और वर्तमान में घटेड अमृत क्लिनिक में नर्स समन्वयक के पद पर कार्य कर रही हैं। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 10 वर्षों का अनुभव है। उर्मिला राजस्थान के डुंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के गाँव  करेलिया की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 5 तक की शिक्षा गाँव के गोपुला फला के सरकारी विद्यालय से व कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा देवला  और 9वीं  से 12वीं तक की शिक्षा रामगढ़ के सरकारी विद्यालय से पूर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने माही स्कूल ऑफ नर्सिंग, बड़ी सरवन, रतलाम, मध्य प्रदेश से नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त की। नर्सिंग को करियर के रूप में चुनने के लिए उन्हें एक परिचित व्यक्ति ने प्रेरित किया, जिनके पुत्र ने नर्सिंग की पढ़ाई की थी। उन्होंने सबसे पहले उर्मिला को नर्सिंग में उपलब्ध रोजगार के अवसरों और मानव शरीर के बारे में मिलने वाले ज्ञान के बारे में बताया|  बाद में उनके पिता से नर्सिंग को एक करियर विकल्प के रूप में चर्चा की। पिता के सहयोग से उर्मिला ने नर्सिंग को अपने पेशे के रूप में चुना।

कीला कुमारी, बीएचएस, नर्स कोऑर्डिनेटर

किला कुमारी बेड़ावल बेसिक हैल्थ केयर द्वारा संचालित अमृत क्लिनिक में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत हैं | वह क्लीनिक पर पर नर्स कोऑर्डिनेटर के पद पर नियुक्त हैं। उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में 5 वर्षों का अनुभव है| कुल मिलाकर 10 वर्षों का कार्य अनुभव प्राप्त है। किला राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की आनंदपुरी तहसील के नवागाँव की निवासी है | उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा 10वीं तक पूर्ण की उसके पश्चात राजकीय महात्मा गांधी चिकित्सालय, बांसवाड़ा से ANM प्रशिक्षण प्राप्त किया। नर्सिंग के क्षेत्र में जुड़ने के लिए उन्हें उनके फूफाजी से प्रेरणा मिली।

रेखा कसोटा, अर्थ, नर्स

रेखा कसोटा वर्तमान में आर्थ संस्था स्वास्थ्य केंद्र, ईसवाल में नर्स के रूप में कार्यरत हैं और पिछले तीन वर्षों से उसी संस्था में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। वे गरणवास, तहसील झाडोल, जिला उदयपुर, राजस्थान की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गढ़-का-वास से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज, भोपाल (मध्य प्रदेश) से जनरल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी (जी.एन.एम.) की पढ़ाई पूरी की।

लोगों की मदद करना और कठिन समय में उनके चेहरों पर मुस्कान लाना उन्हें आत्मिक संतोष देता है। इसी सेवा-भाव और मानवता की भावना के कारण उन्होंने नर्सिंग को अपना पेशा चुना।

मधु नागदा, सरकारी अस्पताल, एएनएम

मधु नागदा वर्तमान में राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में गोगुंदा ब्लॉक, जिला उदयपुर, राजस्थान में एएनएम के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें चिकित्सा विभाग में 23 वर्षों का कार्य अनुभव है। वह रावलिया खुर्द गाँव, गोगुंदा ब्लॉक, जिला उदयपुर (राजस्थान) की निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अहमदाबाद (गुजरात) के बागे फिरदौस म्यूनिसिपल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने गुडली (उदयपुर) स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय से कक्षा 6 से 10 तक की पढ़ाई पूरी की। कक्षा 11 उन्होंने उदयपुर के राजकीय उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय से तथा कक्षा 12 और बी.ए. प्रथम वर्ष प्राइवेट अध्ययन के माध्यम से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से पूर्ण किया। इसके पश्चात उन्होंने सलूम्बर स्थित एनएमटीसी नर्सिंग कॉलेज से एएनएम नर्सिंग पाठ्यक्रम किया।

वह डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण उन्होंने नर्सिंग को अपना करियर चुना। इस पूरे सफर में उन्हें अपने पति का भरपूर सहयोग मिला और उनके शिक्षकों ने भी विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक ऐसे गाँव में पली-बढ़ीं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ अपर्याप्त थीं और परिवहन के उचित साधन उपलब्ध नहीं थे। अक्सर मरीजों को इलाज के लिए उठाकर ले जाना पड़ता था, क्योंकि निकटतम स्वास्थ्य केंद्र लगभग पाँच किलोमीटर दूर स्थित था। इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में आने और अपने गाँव व आसपास के क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।

नेहा श्रीमाली, सरकारी अस्पताल, एएनएम

नेहा श्रीमाली वर्तमान में राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत गोगुंदा ब्लॉक, ज़िला उदयपुर, राजस्थान में एएनएम के रूप में कार्यरत हैं। वे रावलिया कला, गोगुंदा, ज़िला उदयपुर, राजस्थान की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा उच्च माध्यमिक विद्यालय, जसवंतगढ़ से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एनएमटीसी कॉलेज, राजसमंद से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ-साथ उन्होंने बीए और एमए की पढ़ाई भी पूरी की है।

उच्च माध्यमिक स्तर पर वे बायोलॉजी पढ़ना चाहती थीं और उसी क्षेत्र में आगे पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन आसपास कोई ऐसा विद्यालय उपलब्ध नहीं था जहाँ जीव विज्ञान की पढ़ाई हो सके। परिणामस्वरूप उन्हें कला संकाय चुनना पड़ा। बाद में उनके गाँव में आने वाली एएनएम नर्स दीपा ने उन्हें एएनएम कोर्स के बारे में जानकारी दी और बताया कि वे यह कोर्स कर सकती हैं। इसी प्रेरणा से उन्होंने एएनएम करने का निर्णय लिया।

निमिषा पटेल, ग्राम सेवा ट्रस्ट, स्टाफ नर्स

निमिषा पटेल वर्तमान में ग्राम सेवा ट्रस्ट में एनआईसी एवं एसएनसीयू  इंचार्ज के रूप में तथा डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में कुल 15 वर्षों का अनुभव है, जिसमें से 13 वर्ष उन्होंने ग्राम सेवा ट्रस्ट में कार्य करते हुए प्राप्त किए हैं। उनका गाँव जोगवाड, चिखली तालुका, जिला नवसारी, गुजरात में स्थित है।

उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की शिक्षा अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की तथा कक्षा 8 से 12 तक की पढ़ाई श्री बी. एच. पटेल पब्लिक हाई स्कूल, टंकल से पूरी की। कक्षा 12 पूरी करने के बाद उन्होंने बड़ौली स्थित एक निजी नर्सिंग संस्थान से एक वर्ष का पैरामेडिकल नर्सिंग कोर्स किया।

उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में नर्सिंग को करियर के रूप में चुना।

पुष्पा पटेल, ग्राम सेवा ट्रस्ट, सिस्टर इंचार्ज

पुष्पा पटेल वर्तमान में ग्राम सेवा ट्रस्ट में सिस्टर इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें कुल 31 वर्षों का कार्य अनुभव प्राप्त है, जिसमें से 25 वर्षों का अनुभव उन्होंने वर्तमान संस्था में अर्जित किया है।

उनका गाँव एंधाल, तालुका गंडेवी, जिला नवसारी, गुजरात में स्थित है। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। कक्षा 8 से 10 तक की शिक्षा आस्पी कन्या विद्यालय, अंतालिया से पूर्ण की तथा कक्षा 11 और 12 की उच्च माध्यमिक शिक्षा वणियमिल हाई स्कूल, अंतालिया से प्राप्त की।

इसके पश्चात उन्होंने वी. एस. पटेल कॉलेज, बिलीमोरा से तीन वर्षों की कला स्नातक (बी.ए.) की शिक्षा पूरी की। पारिवारिक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिलीमोरा के एक निजी संस्थान से दो वर्षों का पैरा-मेडिकल नर्सिंग कोर्स किया।

रीना पटेल, ग्राम सेवा ट्रस्ट, ओटी इंचार्ज

रीना पटेल ग्राम सेवा ट्रस्ट अस्पताल, खारेल, गुजरात में ऑपरेशन थिएटर इंचार्ज नर्स के रूप में कार्यरत हैं और पिछले 19 वर्षों से इस संस्था से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपना बचपन गुजरात के वलसाड ज़िले में बिताया, जहाँ उन्होंने अपनी नर्सिंग की शिक्षा भी पूरी की। स्कूल में टीकाकरण के लिए आने वाली एक नर्स को देखकर उन्हें नर्सिंग करने की प्रेरणा मिली।उनके पिता, जो दिहाड़ी मजदूर थे, उन्होंने भी रीना को नर्सिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

गीताांजली साहू, जेएसएस अस्पताल, नर्स

गीतांजलि साहू जन स्वास्थ्य सहयोग, गनियारी, छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स (ओटी नर्स) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें नर्सिंग एवं सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 17 वर्षों का कार्य अनुभव है | वह वर्ष 2009 से जन स्वास्थ्य सहयोग से जुड़ी हुई हैं। वह ओडिशा के केंद्रापड़ा ज़िले से हैं, जहाँ उन्होंने अपना बचपन बिताया। उन्होंने एएनएम पाठ्यक्रम में उस समय प्रवेश लिया जब उनके गाँव के पास एक नया नर्सिंग कॉलेज शुरू हुआ था, और एक सहेली के प्रोत्साहन से उन्होंने यह पाठ्यक्रम चुना।

उन्होंने वर्ष 2008 में एएनएम का प्रशिक्षण पूरा किया। जन स्वास्थ्य सहयोग में उन्हें टीम का अच्छा सहयोग मिला, जिससे उन्हें काम के माहौल में ढलने और भाषा व सांस्कृतिक कठिनाइयों को समझने व पार करने में मदद मिली। इससे वे संगठन में लंबे समय तक बेहतर योगदान दे सकीं।

सुचिता पोर्टे, जेएसएस अस्पताल, एएनएम स्टाफ नर्स

सुचिता पोर्टे वर्तमान में जन स्वास्थ्य सहयोग, गनियारी (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) में एएनएम नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 9 वर्षों का कार्य अनुभव है। उनका निवास ग्राम अजयपुर कला, पोस्ट नौरा, ब्लॉक तखतपुर, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़  में है।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा द्वारका प्रसाद शुक्ला हायर सेकेंडरी स्कूल, नवापारा भकुर्रा से पूर्ण की तथा जन स्वास्थ्य सहयोग नर्सिंग स्कूल, गनियारी, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से एएनएम प्रशिक्षण प्राप्त किया।

नर्स बनने से पूर्व उन्होंने आंगनवाड़ी में कार्य किया। नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने यह कार्य छोड़ दिया, जिसमें उन्हें अपने भाई का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।

सावित्री सूर्यवंशी, जेएसएस अस्पताल, एएनएम मेंटर

सावित्री सूर्यवंशी वर्तमान में जन स्वास्थ्य सहयोग (जेएसएस) संस्था में ऑक्सिलियरी नर्स मिडवाइफ (एएनएम) के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में लगभग दस वर्षों का अनुभव है। वह गाँव पुराना सरकंडा, शिवाघाट, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं।

उन्होंने कक्षा 12 वीं  तक की शिक्षा राजकीय विद्यालय से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने बी.ए. एवं एम.ए. की पढ़ाई प्राइवेट से पूर्ण की। वर्ष 2013 में उन्होंने जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था से ऑक्सिलियरी नर्स मिडवाइफ (एएनएम) का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

अपने पिता की प्रेरणा से उन्होंने आरंभ में एक वर्ष का महिला आयुर्वेदिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता का प्रशिक्षण किया। इस दौरान नर्सिंग होम में कार्य करते हुए नर्सिंग के क्षेत्र में उनकी रुचि विकसित हुई, जिसने उन्हें नर्सिंग को अपने करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

वंदना त्रिपाठी, जेएसएस अस्पताल, नर्सिंग ट्यूटर

वंदना त्रिपाठी वर्तमान में जेएसएस अस्पताल में नर्सिंग ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं। उनका गांव नौरोजाबाद, उमरिया ज़िला, मध्य प्रदेश है। उन्होंने कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा कन्या शाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नौरोजाबाद से पूरी की।

इसके बाद उन्होंने बी.एससी. नर्सिंग अनुश्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जबलपुर, मध्य प्रदेश से तथा एम.एससी. नर्सिंग आर.डी. मेमोरियल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, भोपाल, मध्य प्रदेश से पूर्ण की।

नर्सिंग को करियर के रूप में चुनना उनका स्वयं का निर्णय था। उस समय, एक जानकार भैया ने उन्हें और उनकी एक मित्र को नर्सिंग को एक अच्छा क्षेत्र बताते हुए इसे अपनाने की सलाह दी।

इसके बाद उन्होंने अपने पिता से चर्चा की और अपनी इच्छा व्यक्त की कि उन्हें नर्सिंग करना है।

राजश्री नवलखे, एमजीआईएमएस, स्टाफ नर्स

राजश्री नवलखे वर्तमान में महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में स्थित डॉ. सुशीला नायर अस्पताल, उतावली (एमजीआईएमएस) में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें 5 वर्षों का कार्य अनुभव प्राप्त है। उनका मूल निवास अमरावती ज़िले के धारणी गाँव में है। उन्होंने कक्षा 1 से 10 तक की शिक्षा ध्यानमंदिर स्कूल से पूरी की तथा उच्च माध्यमिक शिक्षा धारणी से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने सेवाग्राम, वर्धा स्थित कस्तूरबा स्कूल से जीएनएम नर्सिंग का प्रशिक्षण पूरा किया।

वह चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती थीं और डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकीं और उन्होंने नर्सिंग को अपना पेशा चुना। उनकी बहन के डॉक्टर बनने की यात्रा ने स्वास्थ्य सेवा के प्रति उनकी रुचि और प्रेरणा को और अधिक सशक्त किया।

सरिका राजुरकर, एमजीआईएमएस, एएनएम

सारिका राजुरकर वर्तमान में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (एमजीआईएमएस) के अंतर्गत कस्तुरबा ग्रामीण आरोग्य प्रशिक्षण केंद्र, आंजि (मोठी) में एएनएम के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें कुल 13 वर्षों का कार्य अनुभव है, जिसमें से 7 वर्षों का अनुभव उनकी वर्तमान संस्था में है। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की शिक्षा ज़िला परिषद प्राथमिक विद्यालय, चुनाला से तथा कक्षा 8 से 10 तक की शिक्षा शिवाजी हाई स्कूल, चुनाला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च माध्यमिक (कक्षा 12) की शिक्षा विदर्भ महाविद्यालय, जीवती से प्राप्त की।

उन्होंने वर्ष 2010 से 2012 के दौरान पुणे स्थित बकुल तांबट महर्षि कर्वे श्री शिक्षण संस्था से एएनएम नर्सिंग कोर्स किया। आगे चलकर उन्होंने वर्ष 2022 से 2025 के दौरान सरस्वती नर्सिंग स्कूल, गुंजखेड़ा, पुलगांव से जीएनएम कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण किया। उन्हें बचपन से ही नर्सिंग के क्षेत्र में रुचि थी और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने पिता का पूरा सहयोग मिला।

नंदिनी कंवर, संगवारी, क्लिनिक नर्स इंचार्ज

नंदिनी कंवर संगवारी स्वास्थ्य केंद्र, सरगुजा में नर्स इंचार्ज हैं। उन्हें नर्सिंग क्षेत्र में कुल 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें से 3 वर्ष उन्होंने वर्तमान संस्था में कार्य किया है। वे आमाडांड गाँव, ब्लॉक पेंड्रा, जिला गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं।

उन्होंने अपने गाँव के सरकारी विद्यालय से कक्षा 12 तक की शिक्षा प्राप्त की और जन स्वास्थ्य सहयोग अस्पताल, गनियारी, बिलासपुर से एएनएम की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक वर्ष की इंटर्नशिप की तथा इसके पश्चात पाँच वर्षों तक जन स्वास्थ्य सहयोग अस्पताल में कार्य किया।

उन्हें बचपन से ही स्वास्थ्य क्षेत्र में रुचि रही है। उनके चाचा, जो एक क्लिनिक में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं, ने नर्सिंग के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन दिया। लोगों की सेवा करने और समुदाय की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाने की प्रतिबद्धता ने उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र में एक समर्पित करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

रमेश्वरी राज, संगवारी, स्टाफ नर्स

रामेश्वरी राज वर्तमान में संगवारी में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें यहाँ 3 वर्ष 6 माह का कार्य अनुभव प्राप्त है। उनका मूल गाँव लिम्हा, तहसील बेलतरा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़) है।

उन्होंने कक्षा 10 तक की शिक्षा अपने गाँव के शासकीय विद्यालय से प्राप्त की तथा कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई शासकीय नगर निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिलासपुर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने जन स्वास्थ्य सहयोग स्कूल ऑफ नर्सिंग, गनियारी, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से नर्सिंग शिक्षा प्राप्त की।

अपनी बड़ी बहन के नर्स के रूप में किए जा रहे कार्य को देखकर उन्हें इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली।

सोनिया पंडवाला, सेवा मंदिर, जीएनएम नर्स कोऑर्डिनेटर

सोनिया पंडवाला सेवा मंदिर के कोजवाड़ा स्थित अमृत क्लिनिक में नर्स कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत हैं| उन्हें इस क्षेत्र में 5 वर्षों का अनुभव है। वे ग्राम फला माथा पनवा, पाल पादर, बिछीवाड़ा, ज़िला डूंगरपुर की निवासी हैं। इन्होंने कक्षा 5 तक की शिक्षा अपने गांव में प्राप्त की | कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई के लिए बोखला पाल स्थित विद्यालय में प्रतिदिन लगभग 7 किलोमीटर पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर जाना पड़ता था। इन्होंने पानेरियों की मादड़ी, सेक्टर 4, उदयपुर से जीएनएम नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की | साथ ही कला स्नातक (बी.ए.) की डिग्री भी प्राप्त की। गांव के लोग अक्सर उन्हें ताने मारते थे और “मैडम आईसीयू करके” कहकर मज़ाक उड़ाते थे, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने स्वयं को साबित करने और समाज सेवा के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से उन्होंने नर्सिंग को अपने पेशे के रूप में चुना और आज उन्हें अपने कार्य तथा एक नर्स होने पर गर्व महसूस होता है।

ज्योत्सना पुरोहित, सेवा रूरल, इंचार्ज लेबर रूम

ज्योत्सना पुरोहित वर्तमान में सेवा रूरल हॉस्पिटल, झगड़िया, भरूच में नर्सिंग इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें नर्सिंग असिस्टेंट के रूप में 15 वर्षों का कार्य अनुभव है। वे रायसिंगपुरा, जिला भरूच, गुजरात की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की शिक्षा संजली गाँव के विद्यालय से तथा कक्षा 8 से 12 तक की शिक्षा राजपारडी, जिला भरूच से पूरी की है और वे 12वीं पास हैं। उन्होंने सेवा रूरल हॉस्पिटल, झगड़िया से नर्सिंग प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

टीवी पर डॉक्टरों और नर्सों को मरीजों की सेवा करते हुए और उन्हें स्वस्थ होता देखकर उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र में जाने की प्रेरणा मिली। साथ ही, वे अपने माता-पिता को आर्थिक रूप से सहयोग देना चाहती थीं। इस पूरे सफर में उनके जीजाजी ने उन्हें पूरा समर्थन दिया और सेवा रूरल में नर्सिंग कोर्स के लिए आवेदन करने में उनकी मदद की।

सुनीता वसावा, सेवा रूरल, इंचार्ज - एनआईसीयू

सुनीता वसावा वर्तमान में सेवा रूरल में इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें कुल 12 वर्षों का कार्य अनुभव है। वे सुल्तानपुरा, झगड़िया, जिला भरूच, गुजरात की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की शिक्षा वंखुटा गाँव के विद्यालय से, कक्षा 8 से 10 तक की शिक्षा राजपीपला, जिला नर्मदा से तथा कक्षा 11 और 12 की शिक्षा थावा हाई स्कूल, नेत्रंग, जिला भरूच से पूरी की है। उन्होंने सेवा रूरल, झगड़िया, भरूच से नर्सिंग शिक्षा प्राप्त की है।

टेलीविज़न देखते समय तथा अपने मित्रों को नर्सिंग के क्षेत्र में कार्य करते हुए देखकर उन्हें नर्सिंग करने की प्रेरणा मिली। इससे उन्हें यह विश्वास हुआ कि वे भी नर्सिंग कर सकती हैं और इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।

उजमबेन वसावा, सेवा रूरल, असिस्टेंट मैट्रन

उजमबेन वसावा वर्तमान में सेवा रूरल हॉस्पिटल, झगड़िया में असिस्टेंट मैट्रन के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें इस संस्था में 33 वर्षों का कार्य अनुभव है। वे रानीपुरा, झगड़िया, जिला भरूच, गुजरात की निवासी हैं। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक की प्राथमिक शिक्षा रानीपुरा प्राथमिक विद्यालय से तथा कक्षा 8 से 12 तक की माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा झगड़िया माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। उन्होंने अपनी नर्सिंग शिक्षा सेवा रूरल, झगड़िया से प्राप्त की है।

जब उजमबेन 12वीं कक्षा में अध्ययनरत थीं, तब एक कार्यकर्ता उनके गाँव आया करता था उसी दौरान उस कार्यकर्ता ने उन्हें सेवा रूरल में नर्सिंग के लिए चल रहे इंटरव्यू के बारे में बताया और आवेदन करने की सलाह दी।

 

कमलेश सारथी, शहीद अस्पताल, स्टाफ नर्स

कमलेश कुमारी सारथी वर्तमान में शहीद अस्पताल, दल्ली राजहरा, छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं और नर्सिंग क्षेत्र में उन्हें 15 वर्षों का कार्य अनुभव है। वे दल्ली राजहरा, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बीएसपी हाई स्कूल, दल्ली राजहरा से प्राप्त की तथा भारत नर्सिंग इंस्टिट्यूट, दानी टोला से जनरल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी (जी.एन.एम.) की पढ़ाई पूरी की। इसके अतिरिक्त उन्होंने सात माह का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।

योग प्रशिक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फिजियोथेरेपी का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने नर्सों को मरीजों की देखभाल करते हुए नज़दीक से देखा और विशेष रूप से बुज़ुर्ग मरीजों को दी जाने वाली संवेदनशील सेवा से वे बहुत प्रभावित हुईं। इस अनुभव ने उन्हें स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करने और नर्सिंग के माध्यम से लोगों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।

संगीता साहू, शहीद अस्पताल, स्टाफ नर्स

संगीता साहू वर्तमान में शहीद अस्पताल में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं और नर्सिंग क्षेत्र में उन्हें 20 वर्षों का अनुभव है, जो उन्होंने पूरी तरह इसी संस्था में कार्य करते हुए प्राप्त किया है। वे दल्ली राजहरा, तहसील डौंडी, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं।

उन्होंने कक्षा 1 से 5 तक की प्राथमिक शिक्षा बीएसपी स्कूल नंबर 6, दल्ली राजहरा से प्राप्त की। कक्षा 6 से 12 तक की माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा उन्होंने बीएसपी हायर सेकेंडरी स्कूल नंबर 2, दल्ली राजहरा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने शहीद अस्पताल से सात माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया और तत्पश्चात भारत ऑफ नर्सिंग कॉलेज, दानी टोला, बालोद से जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जी.एन.एम.) का कोर्स पूरा किया। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए.) और मास्टर ऑफ आर्ट्स (एम.ए.) की डिग्रियाँ भी पूर्ण की हैं।

उन्होंने नर्सिंग को करियर के रूप में अपनी माँ की सलाह पर चुना, जिन्हें बाहर कार्य करते समय लोगों और स्वास्थ्य सेवाओं के संपर्क में आने से इस पेशे की जानकारी मिली।

अंकिता सुरेश अहीर, टाइड ट्रस्ट, जीएनएम

अंकिता सुरेश आहिर वर्तमान में भंसाली ट्रस्ट पूर्णा क्लिनिक, मोरज़ीरा, आहवा, डांग ज़िला, गुजरात में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। वे अपनी वर्तमान संस्था में पिछले चार वर्षों से सेवाएँ दे रही हैं तथा नर्सिंग क्षेत्र में उनके पास कुल छह वर्षों का कार्य अनुभव है।

अंकिता ज़री गाँव, आहवा, डांग ज़िला, गुजरात से संबंधित हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 8 तक सरदार विद्यालय, आहवा, डांग से तथा कक्षा 9 से 12 तक माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शाला, आहवा, डांग से पूरी की। कक्षा 1 से 12 तक वे ट्रस्ट हॉस्टल में रहीं, जहाँ हॉस्टल इंचार्ज से उन्हें नर्सिंग क्षेत्र के प्रति निरंतर मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त हुई।

उन्होंने ऑक्सफोर्ड कॉलेज, हैदराबाद से जी.एन.एम. (जनरल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी) की पढ़ाई पूरी की, जिसने उनके पेशेवर नर्सिंग करियर की एक मज़बूत नींव रखी। नर्सिंग पाठ्यक्रम के दौरान उन्हें एन.एस.एम. ट्रस्ट से आंशिक शुल्क सहायता प्राप्त हुई, जबकि शेष शुल्क उनके परिवार द्वारा वहन किया गया।

जब अंकिता नर्सिंग के तीसरे वर्ष में अध्ययनरत थीं, उस समय कोविड-19 महामारी का दौर था। इस चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने दो वर्षों तक एक निजी अस्पताल में नर्स के रूप में कार्य किया और मरीजों की सेवा में सक्रिय योगदान दिया।

रोशनी जगताप, टाइड ट्रस्ट, स्टाफ नर्स

जगताप रोशनी कुमारी सुदामभाई वर्तमान में पूर्णा क्लिनिक, मोरजीरा में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें अपनी वर्तमान संस्था में 3 वर्ष 7 माह का कार्य अनुभव प्राप्त है।

उनका मूल गाँव चिंचधारा, आहवा तालुका, डांग ज़िला, गुजरात में स्थित है। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव से पूरी की। माध्यमिक शिक्षा के दौरान उन्होंने कक्षा 2 और 3 आहवा एकलव्य विद्यालय से तथा कक्षा 4 से 10 तक की पढ़ाई बरूमल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा (विज्ञान शाखा) की शिक्षा आहवा एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल से प्राप्त की। वे अपने गाँव से विज्ञान विषय में शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली व्यक्ति थीं।

उन्होंने वर्ष 2020 में अनन्या स्कूल ऑफ नर्सिंग एंड कॉलेज, कालोल (गांधीनगर) से जनरल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी (जी.एन.एम.) का कोर्स पूरा किया। इसके पश्चात वर्ष 2022 में उन्होंने कार्म इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड साइंस, अहमदाबाद से पोस्ट बेसिक बी.एससी. नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की।

प्रारंभ में उन्हें फार्माकोलॉजी में प्रवेश मिला था, लेकिन उनके पिता के अनुसार उनके क्षेत्र में फार्मेसी चलाना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने वह विषय नहीं चुना। बाद में मुंबई में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत उनकी भुआ के सुझाव पर उन्होंने नर्सिंग को अपने करियर के रूप में चुना। उनकी माता आंगनवाड़ी सुपरवाइज़र थीं और उनके साथ कार्यस्थल पर जाने से रोशनी कुमारी को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों को निकट से देखने का अवसर मिला, जिससे उनकी रुचि इस क्षेत्र में और अधिक प्रबल हुई।

Dr. Ayshwarya Revadkar,
Sexual Health Consultant

Dr. Ayshwarya Revadkar is an obstetrician and gynecologist with over a decade of clinical experience. She has also completed a Post Graduate Diploma in Mental Health and is currently pursuing a Master’s in Public Health. Her work spans clinical care, public health, healthcare training, and sexual health across diverse healthcare settings.

Throughout her career, she has worked in government hospitals, non-governmental organizations, tribal health programmes, and rural district hospitals across Maharashtra, Chhattisgarh, Uttarakhand, and Kerala. She has contributed to clinical services, public health programmes, and the training of healthcare professionals. As a trainer under the Government of India’s LaQshya Programme, she supports the training of health workers in obstetric care.

In addition to her clinical work, Dr. Ayshwarya is a writer. She has authored four books in Marathi, and her articles and stories on gender, health, sexuality, and feminism have been published in newspapers and magazines. She has also conducted sessions on gender, sexuality, and sexual abuse for school and college students, and groups of women and men in different states. She designed the Safar campaign to promote dialogue on sexual abuse and gender equality, and founded Sukhstation, a social media platform that creates awareness about sexuality and sexual health.

FARHANA AFZAL RAFIQ
CHRD Society for Applied Studies, Senior Study Coordinator

Farhana Afzal Rafiqi is an experienced public health nutritionist with nearly 25 years of experience in large-scale public health and nutrition programmes. She holds a master’s degree in food and nutrition and has developed extensive expertise in team leadership, programme operations, vaccine management, and anthropometric assessment.

Throughout her career, Farhana has contributed to strengthening public health and nutrition programmes by building the capacity of professionals in nutrition assessment and public health research. As a WHO-trained Anthropometrist (Gold Standard), she has trained hundreds of public health professionals at both national and international levels, supporting the development of skilled practitioners in the field.

Farhana brings extensive technical expertise and a strong commitment to advancing public health nutrition through capacity building, high-quality nutrition assessment, and evidence-based practice.

MANJU RAJPUT
Aajevika Bureau, Programme Manager, Women Workers’ Empowerment Programme

Manju Rajput is a development practitioner with over two decades of experience advancing women’s rights, gender equality, and the empowerment of women workers. Throughout her career, she has worked closely with rural and tribal communities to strengthen women’s collectives, promote labour rights, and build community-led processes that enhance women’s agency, leadership, and access to social and economic opportunities.

Her work has focused on supporting rural women workers and their families affected by distress migration, particularly in southern Rajasthan. Manju has played a key role in facilitating knowledge-building processes, strengthening women workers’ collectives, and advancing gender-responsive approaches to migration and labour rights. She has also contributed to fostering collaboration among grassroots organisations and collectives, while engaging with state- and national-level advocacy platforms to promote policies and practices that uphold the rights and dignity of women migrant workers.

JANESSA FERNANDES
Kaivalya Education Foundation -Senior Programme Leader

Janessa Fernandes is a development professional with over a decade of experience working across public health, maternal and child nutrition, and early childhood development in rural and tribal communities in India. She holds a master’s degree in social work from the Maharaja Sayajirao University of Vadodara, where she was awarded a Gold Medal for her research on the challenges faced by ASHA community health workers.

Her work has focused on strengthening community health systems by training frontline workers, mobilizing communities for improved access to health and nutrition services, and designing field-based interventions that improve outcomes for women and children. She has worked extensively with community resource persons, panchayati raj institutions, and public systems to implement programmes on maternal and child health, severe acute malnutrition, early childcare, and community health awareness.

Janessa has held programme leadership roles with organizations such as Kaivalya Education Foundation, ANANDI, Aajeevika Bureau, and Deepak Foundation. Her experience spans programme design, training and mentoring frontline teams, monitoring and evaluation, and building partnerships with government and community stakeholders.

She brings grounded field experience, systems thinking, and a strong commitment to strengthening community-centered healthcare delivery.

Ms. Innaciammal Jacob (Kutty Sister)
Jan Swasthya Sahyog -Principal, School of Nursing and Nursing Superintendent

Ms. Innaciammal Jacob (Kutty Sister) is a nurse educator with over two decades of experience spanning clinical nursing, nursing education, and healthcare training.

After beginning her career as a staff nurse in a busy rural hospital and working with community development programmes in Odisha, Ms. Innaciammal joined Jan Swasthya Sahyog (JSS) in 2008 as Nursing Superintendent and Principal. As the chief supervisor of the nursing unit, she handled extremely busy services supporting emergency, outpatient, inpatient, operation theatre, intensive care, maternity, and community health programmes. As a tutor to the Nursing Assistant, GNM, and B.Sc. Nursing programmes, she contributed enormously to the overall nursing training programme development at JSS. Going beyond nursing training, she also contributed to other training programmes such as DNB Family Medicine, DNB General Surgery, paramedical, and other programmes conducted at JSS.

Laxmi Thakur
Seva Mandir,Director programs

Laxmi Thakur is a development leader with over two decades of experience in community development, women’s empowerment, public health, early childhood development, and institutional strengthening. Throughout her career, she has led the design, implementation, and scale-up of programmes that advance gender equity, strengthen community institutions, and improve access to essential health and development services, particularly in rural and tribal communities.

Since joining the development sector in 2001, Laxmi has played a pivotal role in designing training programmes on sexual and reproductive health for women, men, and adolescents, leading women’s empowerment initiatives in remote tribal regions, and strengthening community-based development through innovative programme design and robust management systems. She has also led efforts to expand early childhood care and development initiatives and build effective partnerships with government systems to improve programme quality, reach, and sustainability.

Laxmi provides strategic leadership across a diverse portfolio of development initiatives. She oversees programme strategy and design, mentors multidisciplinary teams, contributes to resource mobilization, and represents the organization in national and external forums. Her leadership is driven by a deep commitment to inclusive development, gender justice, and strengthening community-led institutions.

MANISHA DUTTA
Samyak, Project Lead- Community Health Entrepreneurship

Manisha Dutta is a public health professional with over 10 years of experience in advancing health innovations across rural, tribal, and urban low-income communities in India. She leads the design and scale-up of a Community Health Entrepreneurship model across Pune, Mumbai, and Lucknow, supporting over 150 women and LGBTQ+ health entrepreneurs in delivering doorstep primary healthcare. Her professional experience spans Rajasthan, Assam, Meghalaya, Uttar Pradesh, and Maharashtra, where she has worked across multi-stakeholder forums, consortiums, and health systems, including contributing to a nurse-led primary healthcare model in Rajasthan and leading a state-wide initiative in Meghalaya that strengthened over 6,800 Village Health Councils with national recognition from the Ministry of Health & Family Welfare.

Her expertise lies in public health innovation, community health entrepreneurship, primary healthcare systems, women’s leadership, and equitable access to care. She has worked extensively in healthcare model design, capacity building, community-based healthcare delivery, and health systems strengthening, focusing on empowering women, LGBTQ+ populations, and underserved communities.

She is a Founding Member and the first woman Curator of the Guwahati Hub under the Global Shapers Community, an initiative of the World Economic Forum, and a Climate Reality Mentor leading health and climate initiatives in Assam. She is also a Global Fellow of the WomenLift Health Leadership Program (India Chapter 2026–27), and remains committed to building inclusive, scalable, and sustainable healthcare systems that advance equity and community leadership.

PRANOTI MONDE
Piramal Foundation-Senior Programme Manager

Pranoti Monde works at the intersection of technology and public health systems, designing user-centric digital solutions that improve service delivery at scale. She brings over 10 years of diverse experience spanning the IT sector, nonprofit management, leadership development, and process improvement for social initiatives. She is a Bachelor of Engineering in Information Technology and an India Fellow alumna.

Throughout her career, Pranoti has worked on process setup projects with grassroots nonprofit organisations across the domains of healthcare, livelihoods, agriculture, and youth leadership development. Her work has focused on strengthening organisational processes and designing user-centric digital solutions that improve programme effectiveness and service delivery at scale.

Pranoti brings a multidisciplinary perspective to her work, combining technology, process improvement, and systems thinking to support impactful and sustainable development initiatives.

ROOPA RAWAT SINGHVI
WHO Collaborating Centre for Emergency & Trauma Care, Regional Nursing Lead

Roopa Rawat Singhvi is a nursing leader and healthcare professional with over 20 years of experience in public health and clinical excellence. Throughout her career, she has worked across corporate healthcare, public health systems, non-governmental organizations, and international collaborations, contributing to nursing leadership, health systems strengthening, and quality improvement.

Her expertise includes nursing leadership, emergency and trauma care, rheumatology nursing, and healthcare quality improvement. Roopa has led initiatives in patient safety, capacity building, nursing education, and emergency response. She has also contributed to innovative initiatives, including establishing a nurse-led COVID call centre, developing a Coursera course, and setting up Continuing Nursing Education (CNE) cells in rural and tribal hospitals.

Recognized as India’s first trained rheumatology nurse, Roopa has made significant contributions to nursing practice, education, and research. Her work has been recognized through the Global Champion of the Year 2023 and Nurse Entrepreneur Award 2023. She has also authored 22 research publications, reflecting her continued commitment to advancing nursing leadership and equitable healthcare.